दीपावली पर ‘पैसों में लगाया जाता है आग’! लेकिन कहाँ, क्यों और क्या है रहस्य?

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आप सभी दिवपाली की हार्दिक शुभकामनाएँ और आपके जीवन में रोशनी और ख़ुशहाली के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ।


दीपावली है अंधकार पर प्रकाश की जीत का पर्व

दीपावली रोशनी का त्योहार है, और बिना अग्नि के न तो दीया जलेगा और न ही प्रकाश होगा। इस रात अगर आप गौर से गांव-मुहल्ला पर नजर डालें तो लगेगा कि लाल रंग की मध्दम लौ जल रही है।

अमावस्या होने के कारण यह रात दीपों के कारण मनोरम हो जाती है। एक प्रकार से कहा जा सकता है कि यह अंधेरे पर रोशनी की जीत है।

ना सिर्फ़ उत्तर भारत में बल्कि देश भर में भिन्न भिन्न रूपों में यह त्योहार बङे धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता हैं, इसे मनाने के पीछे बहुत से कारण बतायें जाते हैं।

नई शुरूवात करते है है इस दिन

दीपावली के दिन लक्ष्मी व गणेश की पूजा और दीपक जलाने की परंपरा लगभग हर जगह पर है आज भी यह परंपरा जिंदा है लेकिन बदलते दौर में दीपावली पर गहने व कपङे खरीदने की नई परंपरा भी जोरों पर है। यही कारण है कि नए वाहन, गहने और कपङों की खरीद पर कंपनी खूब डिस्काउंट आॅफर देती है और लोग जमकर खरीदारी करते हैं।

‘पैसों में लगाया जाता है आग’ का कारण?

दीपावली की एक और परंपरा बङी ही काॅमन व प्रचलित है। हालांकि यह परंपरा नए वर्ग के लोगों ने शुरू किया है, इस मौके पर पटाखों की बिक्री भी सबसे ज्यादा होती है और आतिशबाजी भी जमकर होती है। जबकि पटाखों की कीमत सबसे ज्यादा होती है लेकिन दीपावली के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण होने की वजह से इसे हर कोई खरीदता है।

बुजुर्गों का कहना है कि ‘हमारे दौर में ऐसी कोई परंपरा नहीं थी। इन पटाखों की वजह से आग लगना, शरीर का जलना आम बात है और दिल के मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। सिवाए शोरगुल और प्रदूषण के कुछ हासिल नहीं होता, इन पटाखों से शारीरिक और आर्थिक रूप से नुकसान ही होता है।

नए दौर के लोगों ने’ पैसे में आग लगाने’ की परंपरा शुरू कर दिया है’, तो आखिरकार इसी कारणवश इसे कहते हैं ‘पैसों में आग लगाना’।

इसी कड़ी में एक विडीओ भी आज कल WhatsApp समूहों और सोशल मीडिया पर बहुत वाइरल हो रहा है, देखें:

यहाँ आप जो वही पढ़ या देख रहे है ये सिर्फ़ एक विचार और एक पक्ष है, दुनिया भर में सभी प्रकार के ख़ुशी के मौक़ों पर आतिशबाज़ी होती है, चाहे व नववर्ष हो, या किसी अन्य प्रकार का बाधा आयोजन जैसे, खेल टूर्नामेंट, क्रिकेट या किसी अन्य खेल में अपने देश की टीम की जीत, ख़ुशियों के मौक़ों पर आतिशबाज़ी दुनिया भर में आम बात है और सबका हक़ है कि वे अपनी इच्छा और ख़ुशी के अनुसार अपने पैसे ख़र्च करें।

 शुभ दीपावली

लेखक: रवि कुमार गुप्ता
सम्पादक : खेतेश्वर बोरावट

 

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